लोगों केा रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्ा से चलाई गयी विश्व की सबसे बडी रोजगार परक मनरेगा योजना केा आरम्भ से ही भ्रष्ट नौकरशाहो एवं नेताओ की नजर लग गई । और योजना भ्रष्टाचार के मकडजाल मे फस गयी। जिन्होने योजनारम्भ्ा से ही इसमें जमकर लूट पाट की और अपनी तिजोरियॉ भरने में लगे रहे । इनके लिए 2007 से 2010 तक योजना का स्वर्णीम काल रहा, इसके लिए उन्होने प्रारम्भ से ही सुनियोजित तरीके योजना के सही पहलू को जनता से दूर रखा और इसे कुछ लोगों के लिए धन लाभ का साधन बना डाला । योजना को शुरूवात से ही सर के बल चलाया गया । इसे उसके मूल लाभार्थियों अर्थात मजदूरो तक सही ढंग से पहुचने ही नही दिया । जिससे कि वे इस योजना को सही ढंग से समझ सके जैसा कि हमारे देश में अन्य योजनाओ का होता आया है।
योजना का मूल उद्येश्य था कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम के इच्छुक परिवारों केा रोजगार उपलब्ध कराना , जिसके लिए उनकेा जॉब कार्ड ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराया जाना तथा काम की मॉग करने पर कार्य आबटित करना मुख्य था। किन्तु हुआ बिल्कुल उल्टा ग्राम पंचायतों में जॉब कार्ड तो बनाये गये किन्तु वे प्रधानो अथवा अन्य कर्मचारियों पास ही पडे है। जिनका उपयोग मजदूर नहीं बल्कि अन्य लोगों द्वारा अपने हित के लिए किया जाता है, यही कारण है कि पूरे देश में कुल बने जॉब कार्डो में से कुल 23 प्रतिशत मजदूरो की ही कार्य की मॉग दर्ज है बाकी अन्य कार्ड जाली प्रतीत होते है ।
मजदूरो को तो यह भी नही मालूम है कि कार्य की मॉग भी की जाती है , बल्कि स्वहित साध्ाकाे द्वारा उनका मॉग पत्र तैयार कर खानापूर्ति कर दी जाती है , और जॉब कार्ड धारी को कुछ धनरशि देकर इस गोलमान में सहभागी बना लिया जाता है। और मेहनतकश मजदूर को भी भ्रष्ट कामचोर बनाने तथा चाेरी सिखाने का काम किया जाता है। यदि किसी मजदूर द्वारा कार्य की मॉग की भी जाती है तो उसे नियम कानून की पटटी पढाई जाती है और उसके इस कार्य को गुस्ताखी समझा जाता है ।
योजना में ठेकेदारी प्रथा पर पूरी तरह से रोक की बात कही गयी थी , लेकिन यह नियम केवल कागजो तक ही रह गया , किसी भी ब्लाक पंचायत अथवा जिला पंचायत बिना इसके एक भी कार्य नही कराया गया , यही नही बल्कि एक ही कार्य का कई कई ऐजेन्सियों द्वारा भुगतान तक कराया गया ।
अब जब नौकरसाहों का यह कुक़त्य सार्वजनिक हो रहा है , उनके उत्तरदायित्व निर्धारित किये जा रहे है , तथा देश भर की जॉच ऐजेन्सीयॉ उनके कुक़त्यों से पर्दा उठा रही है तेा अब वे इस योजना से पीछा छुडाना चाह रहें है़, साथ ही इस इन्तजार में है कि कब ये योजना बन्द हो और उनकी जान छूटे।
साथियों यह सब होता रहा और हम यह सब होता देखते रहे या कहें उससे सहमत रहे । यह हमारी अकर्मणयता ही है जिससे कि हम आज अपने अस्तित्व के लिए जूझते नजर आ रहें है, काश कि हमने इस याेजना में चल रहे भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाने की हिम्मत की होती तो इस योजना पर केवल और केवल हमारा अधिकार होता हमें मानदेय के चेक के लिए किसी की परिक्रमा नही करनी पडती ।
साथियों अब समय आ गया है ये योजना हमारी है इसे हमें चलाना है , विनियमितीकरण तो हाेना ही है , जब हम इस योजना में अपनी पूर्ण सार्थकता सिद्ध कर देगें तो मजाल है किसी की, विनियमितीकरण को रोक ले।
खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तदबीर से पहले। खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है।।
